आज आप रक्तदाता है, हो सकता है कल आप रक्तग्राही हों।
रक्तदान कर अपना एवं अपनों का जीवन सुरक्षित करें।
रक्तदान के लाभ
रक्तदान के तुरन्त बाद ही नई लाल कोशिकाए बनने से शरीर में स्फूर्ति पैदा होती है।
रक्तदान करते रहने से हृदय रोग में ५ प्रतिशत् की कमी तथा अस्थिमज्जा लगातार क्रियाशील रहती है। रक्त द्वारा संक्रमित होने वाली बीमारियों की स्वतः जॉच हो जाती है।
आवश्यकता पड़ने पर डोनर कार्ड के बदले रक्तकोश से रक्त मिल जाता है।
१ यूनिट ब्लड से कई प्रकार के ब्लड कम्पोनेंट बनाकर कई मरीजों को जीवनदान दिया जा सकता है।
रक्तदान कौन कर सकता है।
प्रत्येक स्वस्थ महिला और पुरूष जिसका वजन ४५ कि० ग्राम से ऊपर तथा उम्र १८ से ५५ वर्ष के मध्य हो।
किसी बीमारी से ग्रस्त न हो और हीमोगलोबिन १२.५ मि०ग्रा० प्रतिशत से कम न हो।
रक्तदान से पूर्व चिकित्सक द्वारा रक्तदाता की जॉच होती है।
रक्तदान में मात्र ५ से १० मिनट ही लगते है। और पुनः रक्तदान ३ माह के बाद किया जा सकता है
एक बार में सामान्यतया ३५० मि०ली रक्त लिया जाता है जिसकी पूर्ति शीघ्र हो जाती है।
रक्तदान हेतु अस्थायी अयोग्यता और अवधि
गर्भपात के ६ माह तक। प्रसव, टाइफाइड बुखार, मलेरिया, टैटू मार्क गोदना, वैक्सीनेशन, पीलिया और हीमोग्लोबिन टीका के एक वर्ष के बाद रक्तदान सम्भव हैं।
कैंसर, हृदय रोग, मधुमेह, हेपेटाइटिस बी, एच०आई०वी०, गुर्दा, यकृत, क्षय(टी०वी०), लाल रक्त कोशिकाओं की बीमारी और अज्ञात कारणों से वजन घटने के रोगी रक्तदान नहीं कर सकते है।